वक्रतुण्ड महाकाय कोटि सूर्य सम प्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
अर्थात :- "गणेशजी को वक्रतुण्ड पुकारा गया है । तुण्ड का सामान्य अर्थ मुख या चोंच होता है, किंतु यह हाथी की सूंड़ को भी व्यक्त करता है । गणेश यानी टेढ़ीमेढ़ी सूंड़ वाले । उनका पेट या तोंद फूलकर बढ़ा हुआ, अथवा भारीभरकम है, अतः वे महाकाय – स्थूल देह वाले – हैं । उनकी चमक करोड़ों सूर्यों के समान है । यह कथन अतिशयोक्ति से भरा है । प्रार्थनाकर्ता का तात्पर्य है कि वे अत्यंत तेजवान् हैं । निर्विघ्न शब्द प्रायः विशेषण के तौर पर प्रयुक्त होता है, किंतु यहां यह संज्ञा के रूप में है, जिसका अर्थ है विघ्न-बाधाओं का अभाव । तदनुसार निहितार्थ निकलता है सभी कार्यों में ‘विघ्न-बाधाओं का अभाव’ रहे ऐसी कृपा करो, अर्थात् विघ्न-बाधाएं न हों ।"
                 CKP LiVE - an unceasing Journal की ओर से  सभी नागरवाशियों को गणपति पूजा की शुभकामनाएं। प्रभु गणपति बप्पा से प्राथना है  की अपनी कृपा सदैव बनाये रखे ।
धन्यवाद !
By Rajni Rk
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